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मेहनत से ही तकदीर बदलती है- जयसिंह सेठिया | Jai Singh Sethia Interview

राजस्थान की राजधानी जयपुर की जानी-मानी शख्सियत जयसिंह सेठिया जिनके समाज सेवा के विभिन्न कार्यों के चलते जयपुर शहर ही नहीं बल्कि पूरे राजस्थान में उनके कार्यों की तारीफ और चर्चा होती रहती है। गरीब और बेबस मरीजों के साथ हर गरीब बेरोजगारों के लिए वह आज किसी मसीहा से कम नही हैं। आज हजारों लोगों की जिन्दगी को वह खुशहाल बना चुके है, चाहे उनके बेहतर ईलाज करवाकर, जिन्दगी बचाने के बात हो या फिर साइकिल रिक्शा, ठेले और सिलाई मशीने निशुल्क प्रदान कर उन्हें रोजगार से जोडऩे की बात हो। राज्य में उनकी सहायता प्राप्त हजारों लोग है। रेडीमेड गारमेंट के निर्यात व्यापार से जुडें जयसिंह सेठिया मूल रूप से सरदार शहर के रहने वाले है। यहीं से उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा ली और फिर राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम. और एल.एल.बी की डिग्री प्राप्त की। अपने पिता स्वर्गीय चन्दन मल जी सेठिया और माता स्व. राजू देवी सेठिया के आशीर्वाद से उन्होंने काफी छोटे स्तर पर अपना गारमेंट निर्यात का व्यापार प्रारंभ किया और कड़े परिश्रम के बल पर अपने व्यवसाय को नई उचाईयों पर पहुंचाया। देश के बड़े निर्यातकों की गिनती में आने वाले जयसिंह सेठिया आज समाज सेवा में काफी सक्रियता से जुड़े हुए है, जिसके लिये उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। प्रस्तुत है व्यवसाय के साथ समाज सेवा का धर्म निभाने वाले जयसिंह सेठिया से हुई बातचीत के कुछ अंश :-

सवाल :- आज आपने समाज सेवा के कार्यों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार कर ली है, आखिर इसकी शुरूआत किस तरह हुयी ?

जबाव :- यह शुरूआत करीब पंद्रह वर्ष पूर्व हुई,जब मैंने सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती कुछ गरीब मरीजों के परिजनों को दवाईयों व भूख से पल-पल लड़ते हुए देखा। उस समय मुझे लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए, क्योंकि उनकी तकलीफे देखकर मेरा मन पिघल गया था। बस ! ठीक उसी दिन से मैने वहाँ कुछ मरीजों के लिए दवाओं और भोजन का इन्तजाम किया, जिसे बाद में नियमित रूप से कर दिया। आज भी सवाई मानसिंह अस्पताल में वर्ष भर यानि 365 दिन निरन्तर भोजन के पैकिट और दवाओं की व्यवस्था बरकरार है। जिसके लिए बकायदा मेरे द्वारा दो व्यक्ति नियुक्त किए गये है, जो मरीजों-परिजनों के लिये उपलब्ध इन व्यवस्थाओं को बखूबी संभालते है।

सवाल :- गरीबों और बेरोजगारों को साइकिल रिक्शें और ठेले प्रदान करने के पीछे आपकी क्या सोच है ?

जवाब :- मैंने देखा कि जयपुर में किराये पर लेकर रिक्शा चलाने वाले गरीब ग्रामीण काफी है, जिनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा किराया चुकाने में ही निकल जाता है, जिसके चलते वह अपना घर खर्च भी बमुश्किल चला पाते है। यही दुखद हालात मुझे नागवार गुजरे और उन्हें रिक्शें-ठेले निशुल्क प्रदान करने के एक बड़े कार्यक्रम की शुरूआत की जिससे अब उनकी जिंदगी काफी सुखद हो गयी है और वह अन्य समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के काबिल बन गये है।

सवाल :- अस्पतालों-विद्यालयों में भोजन वितरण जैसा महान सेवा भावी कार्य का धर्म किस तरह निभाते है?

जवाब :- विद्यालयों में तो अक्षय पात्र के माध्यम से मिड-डे मिल की व्यवस्था बच्चों के लिए कर रहे है और अस्पतालों में तो इसलिए शुरू किया ताकि बाहर से आये बेबस मरीजों और परिजनों को शुद्ध व पोष्टिक खाना मिल सके, क्योंकि भूख उन्हें कमजोर कर रही है। यह भोजन हाई क्वालिटी के डिब्बे में पैक कर हर बैड पर दिया जाता है और इसकी क्वालिटी की जाँच के लिये वह अक्सर यह डिब्बे मंगवाकर कर परिवार सहित खाते भी है।

सवाल :- पुलिस थानों में प्याऊयों का निर्माण भी आपने शहर के ज्यादातर थानों में करवा रखा है, इसके पीछे आपकी क्या सोच है ?

जवाब :- मैं अक्सर देखता था कि कई जगह हमारे मजदूर, स्कूली बच्चे और कई लोग पानी की तलाश में भटकते रहते है क्योंकि प्याऊ हर जगह मौजूद नहीं होती, फिर एक डॉक्टर मित्र ने मुझे बताया कि ज्यादातर लोग अशुद्ध पानी पीने एवं पानी कमी के कारण गंभीर रूप से बीमार पड़ते है। तब मैंने मन में विचार किया कि क्यों न शहर में अत्याधुनिक और आर.ओ. युक्त पानी की प्याऊयों का निर्माण करवाया जाये। ऐसे ही विचार करते हुये पुलिस थानों में प्याऊ बनाने का सुझाव कुछ सहयोगियों ने दिया, फिर इसी क्रम में पहली प्याऊ श्याम नगर थाने में खोली गई जिसका लाभ आमजन के साथ पुलिसकर्मियों को भी मिला। श्याम नगर थाने में खुली इस प्याऊ की सफलता के बाद तो कई थानों में यहाँ की प्याऊ निर्माण के आग्रह आने लगे जिसके चलते आज शहर के करीब सभी थानों में हमारी प्याऊयें चल रही है, और लगभग दो लाख लोग प्रतिदिन इनका लाभ उठा रहे है।

सवाल :- आपने कई अस्पतालों-सार्वजनिक पार्कों में सुन्दरता के लिये विकास कार्य करवायें है, इसका क्या कारण रहा ?

जवाब:- हमारे देश में जो ‘स्वच्छ भारत अभियानÓ चल रहा है, उसमें अपनी तरफ से कुछ योगदान के लिये ही मैने जयपुर शहर में कई जगह बाग-बगीचों को हरा-भरा और सुंदर बनाने की कोशिश है, जिसका सभी लोगों ने स्वागत किया है । हमने जो पार्क अस्पतालों में विकसित किये है वहाँ भर्ती मरीजों पर उनका सकारात्मक प्रभाव भी पडऩे लगा है।

सवाल :- आपने सवाई मानसिंह अस्पताल में कॉटेज वार्ड जैसा विशाल निर्माण कार्य करवाने जा रहे थे, वह कहाँ तक पहुँचा है ?

जवाब :- मैंने तो पांच वर्ष पूर्व ही सरकार को अपनी तरफ से सहमति प्रदान कर दी थी । यह देरी सिर्फ सरकार की तरफ से है इसलिये अब जो करना है, वह सरकार को करना है।

सवाल :- आपके समाज सेवी कार्यों में गरीब, मरीज ही टार्गेट पर होते हैं। ऐसा क्यों?

जवाब :- क्योंकि आज गरीब मरीजों को ही सहायता की जरूरत है। साधन सम्पन्न तो किसी तरह अपनी बीमारी से लड़ लेते है, मगर गरीब और बेबस अक्सर अपनी कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण ईलाज करवा नहीं पाते है और एक दिन असमय ही चल बसते है

और यह स्थिति हमारे समाज पर एक तमाचा है, बस ! यही कुछ सोचकर गरीब मरीजों को स्वस्थ करके नयी जिन्दगी देना ही मेरा लक्ष्य है। और इसके लिये बाकायदा दो व्यक्ति ऐसे मरीजों की हर संभव सहायता के लिए सवाई मानसिंह अस्पताल में नियुक्त कर रखे है।

और यह स्थिति हमारे समाज पर एक तमाचा है, बस ! यही कुछ सोचकर गरीब मरीजों को स्वस्थ करके नयी जिन्दगी देना ही मेरा लक्ष्य है। और इसके लिये बाकायदा दो व्यक्ति ऐसे मरीजों की हर संभव सहायता के लिए सवाई मानसिंह अस्पताल में नियुक्त कर रखे है।

सवाल :- आप जो सरकारी अस्पतालों और स्कूलों में कार्य करवाते है, वहाँ की पहली ड्यूटी क्या सरकार की नहीं थी ?

जवाब :- मुझे लगता है कि जिसकी जरूरत है, वह समय पर पूरी हो जानी चाहिए। मेरी सोच है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्न से कोई भी वंचित नहीं रहना चाहिए। अब सरकार का इंतजार कब तक करे, इसलिए मेरी नजर में ऐसा कुछ नजर आता है तो पहले मैं ही कर देता हूँ।

सवाल :- सरकार को आप राज्य के अन्य अस्पतालों में मरीजों को राहत देने के लिए क्या सुझाव देना चाहेंगे ?

जवाब :- सरकार को सबसे पहले तो हर जिलों या फिर संभाग स्तर पर सवाई मानसिंह अस्पताल जैसे अस्पताल खोलने चाहिए ताकि मरीजों को इलाज के लिए इतनी दूर नहीं आना पड़े और उन्हें अपने पास ही ईलाज सुविधाएँ मिल जायें। सरकार चाहे तो सहायता के लिए भामाशाहों से अपील कर सकती है और इस नेक कार्य के लिए समाज का हर वर्ग सरकार का सहयोग करने आगे आएगा।

सवाल :- आप अपनी व्यस्त जिन्दगी के बीच भी इतने बड़े स्तर पर समाज सेवी कार्यों के लिए योजनाऐं किस तरह से बना लेते है ?

जवाब :- यह सही है, मेरी दिनचर्या बेहद व्यस्त है। मगर समाज के खातिर समय निकालने को मैं तरजीह देता हूँ, इसलिये समय निकल जाता है। साथ ही मेरे अपने सहयोगी मुझे जरूरी जानकारी देकर, अपडेट कर गाईड करते रहते है।

सवाल :- सबसे बडी बात तो यह है कि इतने अधिक सामाजिक कार्यों के बावजूद आप हमेशा पर्दे के पीछे रहना क्यों पसंद करते है। यहाँ तक की आप अपने ही द्वारा करवायें गए निर्माण कार्यों के उद्घाटन समारोह में बामुश्किल आते है। मुझे याद है, एक समय सवाई मानसिंह अस्पताल में आपने जो आईसीयू वार्ड का निर्माण करवाया था, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने आपसे आग्रह किया तब आप पहँुचे। ऐसा क्यों ?

जवाब :- ऐसी बात नहीं है। मुझे केवल केवल मरीजों के लिए बेहतर सुविधायें उपलब्ध करवा कर सरकार को सौंपना है। उद्घाटन कार्यक्रम तो सरकार के लिए होते है। मैं तो सिर्फ एक इंसान हूँ और इंसानियत का धर्म मात्र ही निभा रहा हूँ। गहलोत साहब का तो मैं शुक्रगुजार हूँ, जिन्होंने उद्घाटन समारोह में मुझे साथ रखने का निश्चय किया।

सवाल:- समाज सेवा के एक से बढ़ कर एक कार्यों की एक बहुत लंबी फेहरिस्त के बाद तो सुना था कि कई राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टीयाँ आपको अपने साथ जोड़कर जयपुर से चुनाव लडऩा चाहती हे, आपने ऐसे सुनहरे अवसर को क्यों छोड़ दिया ?

जवाब :- मैं तो सभी से यह कहना चाहता हँू कि अपना जीवन संतोषी बनायें। अपने घर पर खाना बनाते समय गाय की रोटी के साथ इंसानों के लिये भी दो-चार रोटी अवश्य निकाले ताकि हमारे समाज में कोई परिवार भूखा नहीं रहे। साथ ही सबसे खास बात यह की अपना कर्म पूरी तरह ईमानदारी और मेहनत से करे क्योंकि मेहनत से ही तकदीर बदलती है। सिर्फ भाग्य के भरोसे नहीं रहे और ताजिन्दगी अपने कर्म के फर्ज को निभाते हुये चलते रहे।

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