दवाइयाँ

जहरीले कारोबार पर चलाया हथौड़ा

राज्य के औषधि नियंत्रण संगठन ने अभी गत् दिनों निर्माण नगर से कमला एण्टरप्राईजेज के दो ठिकानो से आधे करोड़ से भी ज्यादा रुपयों की नकली दवाओं का जखीरा बरामद किया है यहां से बरामद बड़ी मात्रा में दवाये देखकर औषधि नियंत्रण विभाग की पूरी टीम दंग रह गयी, सैम्पल लेने की रूटीन कार्यवाही के तहत गत् दिनों ही इस फर्म की चार दवाओं के सैम्पल विभाग ने उठाये थे और जब सैम्पल फेल की रिर्पोट आने के बाद कार्यवाही के लिये टीम ने जब गहनता और सूझबूझ से जाँच-पड़ताल की तो नकली दवाओं के यह जखीरे मिल गये। संभवत नकली दवा कारोबार का राज्य में यह सबसे बड़ा खुलासा है। संगठन ने जिस तरह नकली और घटिया दवाओं के चक्रव्यहू को तोडऩे का कार्य किया है वह काबिले-तारीफ है। इन्फेक्शन होने पर मेडिसन से लेकर आईसीयू तक के मरीजों को बतौर एण्टीबायोटिक यह दवायें दी जा रही थी जिनका मरीजो को किसी तरह का लाभ नहीं था। उतराखण्ड के रूड़की की फार्मा लिकंर्स, विजमेड जैसी निर्माता कम्पनी में इनका निर्माण होना बताया गया है जब की वहां इस तरह की कम्पनी है ही नहीं यानि की पूरा फर्जीवाड़ा हैरानी है गत् दस वर्षों से यह फर्म एण्टीबायोटिक का व्यापार कर रही है, इस पर विभाग की नजर नहीं पडऩा भी कई सवाल खड़े करता है दवा के निर्माण से लेकर थोक बिक्री फिर रिटेल बिक्री तक लगाता है पूरा रैकेट बना हुआ था जहां मोटी कमीशन के लालच में यह मरीजों को दी जा रही थी। हालांकि अभी इससे कई खुलासे होने बाकि है मगर यह भी सच है कि इंसान की जान से ज्यादा धन को महत्व दिया जाने लगा है। यह मामला लालच की पराकाष्ठा है जहाँ मरीजों की जिन्दगी को दावं पर लगा कर तिजोरियां भरी जा रही है। यह तो भला हो औषधि नियंत्रण संगठन का जिसने नकली दवाओं के कारोबार का यहां भाड़ाफोड़ कर कई मरीजों की जान बचा ली है। संगठन ने तो अपना रोल निभा लिया है मगर यहां जिम्मेदारी उन केमिस्टो और डॉक्टर्स को भी निभानी चाहिये की समाज में यह नकली दवायें बिके ही नहीं इसलिये विभाग को खासकर केमिस्टो पर भी अपना शिकंजा कसना चाहिये जहां से सीधा यह नकली दवायें मरीजों को बिक्री की जाती है इस अंतिम कड़ी पर भी प्रहार करना जरूरी है। औषधि नियंत्रण संगठन इससे पूर्व भी सफलता के कई झंडे फहरा चुका है इससे पूर्व हीदा की मोरी में नशीली दवाओं और गर्भपात किटों का जखीरा पकडऩे निजि हॉस्पिटल में स्टेंट और आर्थोपेडिक इन प्लांट पर गड़बडिय़ों का खुलासा, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शनों की खेप पकडऩा जैसी कई शानदार कार्यवाहियां विभाग ने की है और अब इस बम्पर कार्यवाही कर इस जहरीले कारोबार का भंडाफोड किया है इसके लिये वह बधाई का पात्र है।

नकली दवाओं के कारोबार को रोकने के लिये पुलिस का सहयोग भी बेहद जरूरी है, औषधि नियंत्रण संगठन की कार्यवाहीयों के बाद पुलिस को भी सक्रियता के साथ गुनहगारों को कटघरों तक पहुंचाने होंगे क्यों की यह जहरीला व्यापार अब माफिया गिरोहों के पास आ गया है जहां इनके रैकेट बने हुये है जिन्हें तोड़कर जड़ से उखाडऩे का कार्य पुलिस कर सकती है साथ ही ड्रग इंस्पेक्टरों को भी उनकी ड्यूटी के प्रति ज्यादा जिम्मेदार बनाना होगा क्योंकि की नकली दवाओं के व्यापार रोकने की पहली भूमिका उन्हीं की रहती है मौते बांट रहा नकली दवाओं का यह व्यापार अभी तक पता नहीं देश के कितने निर्दोष लोगों को अपना निशाना बना चुका होगा, राजस्थान के औषधि नियंत्रण संगठन ने जो कदम उठाने शुरु किये है उन्हें अब आगे बढ़ते रहने देना होगा ताकि नकली दवा के माफिया यहां अपने व्यापार की जड़े नहीं जमापायें।

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