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डूब रहा है साइकिल का जहाज

जयपुर। भागती-दौड़ती जिन्दगी सीमायें तोड़ते शहर-कस्बे, ऊँचे-ऊँचे अपार्टमेन्टस्, चमचमाती सड़कें, तेज रफ्तार वाले दोपहिया और चार पहिया वाहनों के एक से बढ़कर एक मॉडल, इन्टरनेट, व्हाटसएप की तरह और भी बहुत कुछ आज हमारी जिन्दगी में शामिल हो गया है। अगर यह कहे की प्रतिस्पर्धा की आपाधापी में इन्सान आज एक मशीन बन कर रह गया है तो गलत नहीं होगा। यह सब बदलाव हमारे समाज और देश की तरक्की के चलते आये है और इन बदलावों ने हमारी जिन्दगी तो बदल ही दी है लेकिन साथ में कुछ व्यापारों में भी बदलाव आ गये है, कुछ का ग्राफ काफी ऊपर चढ़ गया है तो कुछ व्यापार निढाल हो गये है। ऐसा ही कुछ दुखद बदलाव साइकिलों के व्यापार में भी आ गया है और वह इस समय ढ़लान की और जाता जा रहा है, जिसके चलते इस व्यापार से जुड़े लोगों को भी अब नये सिरे से अब सब कुछ नया सोचना पड़ रहा है कि अब जिन्दगी के इस मोड़ पर वह क्या करें। आज साइकिल हमारी जिन्दगी से दूर होती जा रही है वह भी काफी तेजी से बचपन में साइकिल चलाने वाले मासूम आज स्कूल भी ऑटो या बस वगैरहा से जाने लगे है, स्कूल के बाद ट्यूश्न और फिर टेलीविजन पर आने वाले सैटेलाइट चैनलों का मोह अब इन सबके बीच साइकिल उनकी जिन्दगी से लुप्त हो गयी है। वह बस उन्हें एक खिलौने की तरह अभिभावकों से मिल जाती है। स्कूलों के साइकिल स्टेण्ड़ों पर अब स्कूटी और मोटर साइकिलों की ही भीड़ नजर आती है, यहां साइकिल अब नहीं है। स्कूली बच्चों के बाद किशोरावस्था और युवा तो अपने स्टेटस सिबंल के चलते साइकिल से स्वत: ही दूर हो गये है और वह इसे अब आँख उठाकर देखना भी नहीं चाहते। साइकिल आज शहरों से ही नहीं बल्कि गाँवों से भी गायब होती जा रही है। शहरों में आवाजाही के काफी तरह के अन्य साधनों के कारण साइकिलों की उपयोगिता घट गयी है और रही बात गाँवों की वहां घर-घर में आ चुकी मोटर साइकिलें, एक गाँव से दूसरे गाँव जाने के लिये जीपे, जुगाड़, सरकारी-निजी बसों इत्यादि ने साइकिलों को कुचल कर रख दिया है। एक तरह से साइकिल हमारी जिन्दगी से दूर होती जा रही है। राजधानी जयपुर के कुछ साइकिल विक्रेताओं ने बताया कि उनकी अगली जनरेशन अब इस व्यापार में नहीं आना चाहती क्योंकि साइकिल व्यापार का भविष्य अब अंधेरे में है और वह इस व्यावसाय में आकर अपनी जिन्दगी तबाह होते नहीं देख सकते। अभी तक राज्य में लाखों परिवार साइकिल व्यापार से किसी ना किसी तरह जुड़े हुये है। होलसेल व्यापारी, रिटेलर, रिपेयरिंग करने वाले, पंचर की दुकानें और फिर बड़ा नुकसान साइकिल के कलपुर्जों का व्यापार करने वाले को हुआ है।

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