Bandar monkey

बन्दर करते है बेसब्री से इंतजार

आज का भयंकर प्रतिस्पर्धा वाला वक्त जहाँ बुरी तरह भागमभाग लगी हुई है और हर कोई एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में है। व्यापारिक दौर के इस समय अपनो के लिए भी समय निकालना बेहद मुश्किल है बात चाहे बुजुर्ग माता-पिता की हो या पत्नी और बच्चों की। लेकिन इस आर्थिक और मशीनीयुग में राजधानी जयपुर में एकऐसा श स मौजूद है जो इन सबके बीच भी मूक जानवरों के लिए अपना कीमती समय पूरे वर्ष के 365 दिन बिना नागा निकाल रहा है।

रामगंज बाजार के फूटा खुर्रा में रहने वाले पचास वर्षीय छोटेलाल कुशवाह गत् 18-20 वर्षो से प्रतिदिन चाहे आंधी हो या तूफान तीर्थस्थल गलता जी में जाकर बन्दरों को बीस किलो आटे की रोटियाँ बेहद प्यार-मनुहार से खिला रहे है। सुबह छ:-सात बजे के बीच यहाँ पहुँचने वाले छोटेलाल का इन्तजार भी बन्दर काफी बेसब्री से करते है और जैसे ही वह अपनी स्कूटी से वहाँ पहुँचते है तमाम बन्दरों में उल्लासपूर्ण उछल-कूद शुरू हो जाती है, तब छोटेलाल के कन्धों पर, हाथो पर आकर बैठ जाते है और बेहद प्यार दुलार से उन्हें रोटी के टुकड़े कर के देते है। रोजाना यह दश्र्य देखने भी कई लोग पहुँचते है। विदेशी पर्यटक तो उनकी यह अद्भूत तस्वीरे अपने कैमरों में कैद करते नजर आते है। छोटेलाल ने हैलो जयपुर संवाददाता को बताया कि उन्होंने यह सेवा अपने मिलने वाले कैलाश जी की प्रेरणा से प्रार भ की थी और इस सेवा में कई लोग आर्थिक सहयोग नियमित देते है जिसके चलते मूक बन्दरों की सेवा बदस्तूर चल रही है। छोटेलाल यह रोटीयाँ छोटी चौपड़ से किलो के हिसाब से बनवाते है और गलता जी के बन्दरों के अलावा हर रविवार को खोले के हनुमान जी गौशाला में भी वह पचास किलो आटे की रोटियाँ कुछ लोगों के सहयोग से बांटते हे। ज्वैलरी का खुला व्यापार करने वाले छोटेलाल ने बताया कि इन सब कार्य में उनका परिवार और मित्र वगैरहा भी पूरा सहयोग करते है और उनकी तो बस यही इच्छा है कि वह जिन्दगी भर इसी तरह इन मूक जानवरों की सेवा करते रहेक्योंकि इससे उनको असीम सुख-शांति का मानसिक अहसास जो होता है।

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